यह काल हिंदी साहित्य में एक नए युग का सूत्रपात करता है, जिसमें गद्य का विकास हुआ और सामाजिक, राजनीतिक और राष्ट्रीय चेतना प्रमुखता से उभरी। इसे कई उप-कालों में विभाजित किया गया है।
प्रमुख कवि/लेखक
भारतेंदु हरिश्चंद्र
महावीर प्रसाद द्विवेदी
जयशंकर प्रसाद
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
सुमित्रानंदन पंत
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