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An ancient manuscript with Hindi calligraphy.

आधुनिक काल

1900-अब तक

इस युग के बारे में

आधुनिक काल हिंदी साहित्य में एक क्रांतिकारी परिवर्तन का प्रतीक है। अंग्रेजों के आगमन, औद्योगिकीकरण, और राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम ने समाज और साहित्य दोनों को एक नई दिशा दी। इस युग में खड़ी बोली गद्य की मुख्य भाषा बनी और कविता के साथ-साथ उपन्यास, कहानी, नाटक, निबंध और आलोचना जैसी गद्य विधाओं का अभूतपूर्व विकास हुआ। इस काल को विभिन्न वैचारिक और साहित्यिक आंदोलनों के आधार पर कई उप-कालों में विभाजित किया गया है, जिनमें भारतेंदु युग (राष्ट्रीय चेतना का उदय), द्विवेदी युग (भाषा का परिष्कार), छायावाद (रोमांटिक और रहस्यवादी कविता), प्रगतिवाद (सामाजिक यथार्थ), प्रयोगवाद (नए शिल्प और विचार) और नई कविता शामिल हैं। यह युग आज भी जारी है और साहित्य की नई संभावनाओं को तलाश रहा है।

प्रमुख विशेषताएँ
  • खड़ी बोली गद्य का विकास और प्रतिष्ठा।
  • राष्ट्रीय, सामाजिक और राजनीतिक चेतना की अभिव्यक्ति।
  • मानववाद और यथार्थवाद पर जोर।
  • विभिन्न गद्य विधाओं (उपन्यास, कहानी, नाटक, निबंध) का उदय।
  • कविता में नए विषयों और शैलियों का प्रयोग।
  • साहित्य का लोकतंत्रिकरण, आम आदमी की समस्याओं का चित्रण।
प्रमुख कवि और रचनाएँ

भारतेंदु हरिश्चंद्र

भारत दुर्दशा
अंधेर नगरी

महावीर प्रसाद द्विवेदी

काव्य मंजूषा
रसज्ञ रंजन

जयशंकर प्रसाद

कामायनी
स्कंदगुप्त
चंद्रगुप्त

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

राम की शक्ति पूजा
सरोज स्मृति
कुकुरमुत्ता

सुमित्रानंदन पंत

चिदंबरा
पल्लव
ग्राम्या

महादेवी वर्मा

यामा
दीपशिखा
अतीत के चलचित्र

रामधारी सिंह 'दिनकर'

उर्वशी
रश्मिरथी
संस्कृति के चार अध्याय

अज्ञेय

कितनी नावों में कितनी बार
शेखर: एक जीवनी

हरिवंश राय बच्चन

मधुशाला
क्या भूलूँ क्या याद करूँ