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An ancient manuscript with Hindi calligraphy.

आदिकाल (वीरगाथा काल)

1050-1375

इस युग के बारे में

आदिकाल, जिसे 'वीरगाथा काल' भी कहा जाता है, हिंदी साहित्य का प्रारंभिक और foundational चरण है। यह राजनीतिक अस्थिरता और निरंतर युद्धों का काल था, जिसका गहरा प्रभाव तत्कालीन साहित्य पर पड़ा। इस युग की कविता मुख्य रूप से 'चारण' कवियों द्वारा रची गई, जो अपने आश्रयदाता राजाओं की वीरता, शौर्य और युद्धों का अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन करते थे। 'रासो' काव्य इस काल की सबसे प्रमुख साहित्यिक विधा थी, जिसमें 'पृथ्वीराज रासो' सबसे प्रसिद्ध महाकाव्य है। वीर-रस के अलावा, इस काल में सिद्धों और नाथों द्वारा रहस्यवादी और दार्शनिक कविताएँ भी लिखी गईं, और अमीर खुसरो जैसे कवियों ने खड़ी बोली में पहेलियाँ और गीत लिखकर भाषा को एक नया रूप दिया।

प्रमुख विशेषताएँ
  • वीर रस की प्रधानता।
  • युद्धों का सजीव और विस्तृत वर्णन।
  • आश्रयदाता राजाओं की प्रशंसा।
  • ऐतिहासिकता और कल्पना का मिश्रण।
  • डिंगल और पिंगल भाषाओं का प्रयोग।
  • श्रृंगार रस का भी समावेश मिलता है।
प्रमुख कवि और रचनाएँ

चंदबरदाई

पृथ्वीराज रासो

नरपति नाल्ह

बीसलदेव रासो

जगनिक

आल्हा-खंड (परमाल रासो)

अमीर खुसरो

पहेलियाँ, मुकरियाँ, ख़ालिकबारी

विद्यापति

कीर्तिलता
पदावली